इन्दौर | (संभाग पोस्ट) बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और पीड़ितों को थानों के चक्कर काटने से बचाने के लिए इन्दौर पुलिस कमिश्नरेट ने एक ठोस कदम उठाया है। पुलिस आयुक्त श्री संतोष कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आज पुलिस कमिश्नर कार्यालय में थाना स्तर के पुलिसकर्मियों के लिए एक दिवसीय विशेष साइबर ट्रेनिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मुख्य बिंदु: तकनीकी रूप से सशक्त होगी इन्दौर पुलिस
1). थाना स्तर पर समाधान: प्रत्येक थाने में तैनात पुलिसकर्मी अब साइबर एक्सपर्ट की तरह काम करेंगे, ताकि पीड़ित को क्राइम ब्रांच के चक्कर न लगाने पड़ें।
2). 80 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण: नगरीय क्षेत्र के सभी थानों से आरक्षक व प्रधान आरक्षक स्तर के जवानों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया गया।
3). सरकारी पोर्टल्स का ज्ञान: NCRP से लेकर ‘समान्वय’ तक, भारत सरकार के विभिन्न पोर्टल्स के प्रभावी उपयोग का दिया गया प्रशिक्षण।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ प्रशिक्षण
कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस आयुक्त श्री संतोष कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति में हुआ। इस दौरान अति. पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) श्री अमित सिंह, अति. पुलिस आयुक्त (अपराध/मुख्यालय) श्री आर.के. सिंह सहित शहर के सभी DCP, Additional DCP और ACP मौजूद रहे।

इन पोर्टल्स के जरिए अनुसंधान होगा सशक्त
क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया और उनकी टेक्निकल टीम ने पुलिसकर्मियों को प्रजेंटेशन के माध्यम से निम्नलिखित पोर्टल्स की कार्यप्रणाली समझाई:
1). NCRP & cybercrime.gov.in: शिकायतों को तत्काल दर्ज कर वित्तीय फ्रॉड को रोकना।
2). 1930 हेल्पलाइन: पीड़ित की कॉल पर त्वरित रिस्पॉन्स।
3). SANCHAR SATHI: मोबाइल और सिम कार्ड संबंधी फ्रॉड की रोकथाम।
4). अन्य महत्वपूर्ण पोर्टल्स: SAMANVAY, VATSALYA MISSION, E-DAR, NIDAAN और CYBER POLICE PORTAL।
“हमारा विजन है कि इन्दौर पुलिस का हर जवान तकनीकी रूप से इतना सक्षम हो कि पीड़ित को थाने आते ही समाधान मिल सके। नई तकनीक के दौर में साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही ही हमारा ध्येय है।” श्री संतोष कुमार सिंह, पुलिस आयुक्त, इन्दौर
कैसे मिलेगी पीड़ितों को मदद?
ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई पीड़ित साइबर फ्रॉड की शिकायत लेकर थाने पहुंचता है, तो वहां तैनात प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तत्काल 1930 या साइबर पोर्टल पर उसकी शिकायत दर्ज कराएं। इससे फ्रॉड की गई राशि को ब्लॉक करने और अपराधी तक पहुंचने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
इन्दौर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुलिसकर्मियों को अपडेट रखने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।

