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Monday, March 2, 2026
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भगवानपुरा में भगोरिया की धूम, ढोल-मांदल की थाप पर जमकर थिरके आदिवासी

खरगोन (संभाग पोस्ट) भगवानपुरा पश्चिम निमाड़ के खरगोन जिले में लोक संस्कृति के महापर्व ‘भगोरिया’ का आगाज हो चुका है। सोमवार को भगवानपुरा के साप्ताहिक हाट-बाजार में आदिवासियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। होली के त्यौहार से सात दिन पहले शुरू होने वाले इस उत्सव ने पूरे अंचल को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया है।

लोक संस्कृति का भव्य संगम
भगवानपुरा में आयोजित इस भगोरिया मेले में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति का नजारा देखते ही बना। पारंपरिक और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे युवक-युवतियों ने मेले की रौनक बढ़ा दी। हाट-बाजार में आदिवासी संस्कृति के प्रतीक ढोल और मांदल की गूंज के साथ हर कोई थिरकता नजर आया।

नेताओं ने भी मिलाए कदम से कदम
इस बार भगोरिया का उत्साह केवल आम जनता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक हस्तियां भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाईं।
1: विधायक केदार डाबर और पूर्व विधायक जमुनासिंह सोलंकी ने भी मांदल की थाप पर आदिवासियों के साथ कदम से कदम मिलाकर नृत्य किया।
2: क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने मेले के उत्साह को दोगुना कर दिया।

हर वर्ग में दिखा जबरदस्त उत्साह
मेले में आधुनिकता और परंपरा का अनूठा मिश्रण देखने को मिला। चिलचिलाती धूप के बावजूद:
1: बुजुर्ग: अपनी परंपराओं को सहेजते हुए नजर आए।
2: युवा: सेल्फी और पारंपरिक नृत्य के साथ उत्सव का आनंद लेते दिखे।
3: बच्चे और महिलाएं: पारंपरिक गहनों और परिधानों में सजकर मेले का लुत्फ उठाने पहुंचे।

बाजारों में रौनक, झूले और पकवानों का दौर
भगोरिया के अवसर पर भगवानपुरा का बाजार पूरी तरह सजा हुआ था। झूलों पर बच्चों की भीड़ रही, तो वहीं हाट में मिलने वाले पारंपरिक पकवानों का लोगों ने जमकर स्वाद लिया। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि उत्सव शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो सके।

खास बात: भगोरिया केवल एक मेला नहीं, बल्कि निमाड़ और झाबुआ अंचल के आदिवासियों की पहचान और आपसी मिलन का सबसे बड़ा केंद्र है।

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