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Saturday, March 14, 2026
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शिक्षकों का हल्लाबोल: TET की अनिवार्यता के खिलाफ लामबंद हुए शिक्षक

खरगोन |(संभाग पोस्ट) मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। इस आदेश के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। शुक्रवार को खरगोन मुख्यालय पर मप्र शासकीय शिक्षक संगठन के बैनर तले शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

SDM कार्यालय में नारेबाजी, आदेश वापस लेने की मांग
शुक्रवार को बड़ी संख्या में शिक्षक एसडीएम कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए। यहाँ सरकार के नए नियमों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। शिक्षकों का कहना है कि यह आदेश उन पर मानसिक और पेशेवर दबाव बनाने वाला है। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी हालिया निर्देशों के अनुसार:

  1. RTE एक्ट 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी अब अपनी सेवा जारी रखने के लिए TET परीक्षा पास करनी होगी।
  2. सरकार का तर्क है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए यह मानक जरूरी है।

वहीं, शिक्षक संगठनों का कहना है कि दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अब परीक्षा का बोझ डालना अनुचित है।

शिक्षक संगठनों की मुख्य मांगें
ज्ञापन के माध्यम से शिक्षक नेताओं ने सरकार के सामने निम्नलिखित बिंदु रखे हैं:

  1. आदेश का पुनरावलोकन: सरकार इस “दमनकारी” आदेश को तत्काल वापस ले।
  2. कानूनी हस्तक्षेप: शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका दायर करे।
  3. अनुभव को प्राथमिकता: संगठनों का तर्क है कि जो शिक्षक 15-20 वर्षों से पढ़ा रहे हैं, उनकी योग्यता का पैमाना परीक्षा नहीं, बल्कि उनका अनुभव होना चाहिए।

“हम वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं। अचानक इस तरह के नियम थोपना शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ है। सरकार को हमारी सेवा शर्तों का सम्मान करना चाहिए।”—प्रतिनिधि, मप्र शासकीय शिक्षक संगठन

आगे क्या?
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल शुरुआत है। यदि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया गया, तो आगामी दिनों में शिक्षण कार्य ठप कर जिला और राज्य स्तर पर बड़े प्रदर्शन किए जाएंगे।

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