इंदौर |(संभाग पोस्ट) पुलिस कमिश्नरेट द्वारा ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में क्राइम ब्रांच को एक और बड़ी सफलता मिली है। सीनियर सिटीजन को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 40.70 लाख रुपये की ठगी करने वाली गुजरात की अंतर्राज्यीय गैंग के फरार आरोपी को पुलिस ने धर दबोचा है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
इंदौर निवासी एक 71 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग ने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि अक्टूबर 2024 में उन्हें एक व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बांदा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया और डराया कि उनके नाम पर मुंबई के केनरा बैंक से 2.60 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है।
ठगों ने बुजुर्ग को विश्वास दिलाने के लिए निम्नलिखित हथकंडे अपनाए:
- फर्जी दस्तावेज: सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और गिरफ्तारी वारंट की कॉपियां भेजीं।
- डिजिटल अरेस्ट: सीबीआई अधिकारी ‘आकाश कुलकर्णी’ बनकर बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर डराया और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए अपनी सारी जमा पूंजी (FD तुड़वाकर) कथित ‘RBI वेरिफिकेशन खाते’ में डालने को कहा।
- बड़ी राशि की ठगी: डर के मारे फरियादी ने कुल 40,70,000 रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस की कार्रवाई और अब तक की गिरफ्तारियां
क्राइम ब्रांच इंदौर ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर की सूचना पर इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है:
- ताजा गिरफ्तारी: गैंग का फरार सदस्य पीयूष परमार (निवासी सूरत, गुजरात) गिरफ्तार।
- पूर्व में गिरफ्तार आरोपी: हिम्मत भाई देवानी (58) और अतुल गिरी गोस्वामी (46), दोनों गुजरात निवासी।
- खाते फ्रीज: पुलिस ने इस गिरोह से संबंधित 23 बैंक खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कर दिया है।
“आरोपी गैंग के सदस्य खुद को पुलिस और CBI अधिकारी बताकर रोजाना सैकड़ों लोगों को कॉल करते थे। पीयूष परमार ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह गैंग को ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था।” — इंदौर क्राइम ब्रांच
ठगी का तरीका
यह गैंग देश के विभिन्न राज्यों में बैठकर संचालित होती है। इनका मुख्य काम सीनियर सिटीजंस को निशाना बनाना है। ये फर्जी सीबीआई/पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को केस में फंसाने की धमकी देते हैं और घंटों तक फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर मानसिक दबाव बनाते हैं, ताकि शिकार बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दे।
कानूनी कार्रवाई
इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। वर्तमान में आरोपी पुलिस रिमांड पर है, जिससे गैंग के अन्य नेटवर्क और मास्टरमाइंड के बारे में पूछताछ की जा रही है।
सावधान रहें: पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 पर दें।

