खरगोन |(संभाग पोस्ट) रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होते ही फिजाओं में एक अलग ही सुकून और रूहानियत घुल गई है। चाँद के दीदार के साथ ही मुस्लिम समाज में खुशियों की लहर दौड़ गई है और मस्जिदों से लेकर घरों तक अल्लाह की इबादत का दौर शुरू हो चुका है।
इबादत का दौर: रोज़ा, नमाज़ और तिलावत
रमज़ान के पहले दिन से ही रोज़ेदारों का जज्बा देखते ही बन रहा है। नन्हे बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर कोई इस पाक महीने की बरकतों को समेटने में जुटा है। पाँच वक्त की नमाज़, कुरान शरीफ की तिलावत और अल्लाह के ज़िक्र से शहर की मस्जिदें आबाद हैं।

बाज़ारों में रौनक: मोहन टाकीज क्षेत्र बना आकर्षण का केंद्र
शाम होते ही बाज़ारों का नज़ारा बदल जाता है। विशेष रूप से मोहन टाकीज क्षेत्र में इफ्तार की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। बाज़ार तरह-तरह के खजूरों, ताजे फलों और ज़ायकेदार पकवानों से सजे हुए हैं। लोग न केवल अपने लिए बल्कि पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों के लिए भी इफ्तार की सामग्री खरीदते नज़र आ रहे हैं।
तरावीह की गूँज और शब-ए-कद्र का इंतज़ार
मगरिब की नमाज़ और इफ्तार के बाद, ईशा की नमाज़ के साथ तरावीह का सिलसिला शुरू हो जाता है। हाफ़िज़-ए-कुरान की तिलावत सुनने के लिए मस्जिदों में भारी तादाद में अकीदतमंद पहुँच रहे हैं।

“रमज़ान के इस पाक महीने में एक ऐसी मुबारक रात (शब-ए-कद्र) आती है, जो हज़ार महीनों की इबादत से भी अफ़ज़ल है। यही कारण है कि लोग रातों को जागकर खुदा की बंदगी कर रहे हैं।”
ज़कात और इंसानियत का पैगाम
यह महीना सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र और हमदर्दी का भी है। शहर में जकात और खैरात देने का सिलसिला तेज़ हो गया है, ताकि समाज का हर तबका ईद की खुशियों में शामिल हो सके। यह महीना इंसानियत और एकता की एक बेमिसाल मिसाल पेश कर रहा है।

