इंदौर | (संभाग पोस्ट) सामाजिक समरसता और भक्ति का अनूठा संगम गुरुवार को हंसदास मठ में देखने को मिला। विश्व ब्राह्मण समाज संघ, अनंत सेवा न्यास और हंसदास मठ संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘विशाल फाग उत्सव’ ने इंदौर को ब्रज के रंग में सराबोर कर दिया। देर रात तक चले इस उत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने फूलों की होली और भजनों का आनंद लिया।
प्रमुख आकर्षण: ब्रज की लठमार होली और फूलों की वर्षा
वृंदावन और ब्रज से आए कलाकारों ने जब मंच पर राधा-कृष्ण की लठमार होली का जीवंत प्रदर्शन किया, तो उपस्थित जनसमूह झूम उठा। पूरा परिसर इत्र की खुशबू और गुलाब-मोगरे की पंखुड़ियों से महक उठा।
प्रसिद्ध भजन: गायक गन्नू महाराज और साथियों ने “आज बिरज में होली रे रसिया”, “लगवाइले गोरी रंग गोरे गालन पर” और “बाबा श्याम के दरबार में मची होली” जैसे भजनों से समां बांध दिया।
सामाजिक संकल्प: शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण पर जोर
उत्सव के दौरान भक्ति के साथ-साथ समाज सुधार का संकल्प भी लिया गया। विश्व ब्राह्मण समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित योगेंद्र महंत ने आगंतुकों को चार मुख्य बिंदुओं पर कार्य करने का संकल्प दिलाया:
1). शिक्षा और संस्कार: समाज के हर वर्ग तक व्यावहारिक शिक्षा पहुँचाना।
2). रोजगार: युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु सामूहिक प्रयास।
3). पर्यावरण संरक्षण: अधिक से अधिक पौधे लगाना और पेड़ों का संरक्षण करना।
4). सामाजिक समरूपता: समाज में एकता और भाईचारे का भाव जागृत करना।
“पर्यावरण बेहतर रहेगा तो हमारा स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। पेड़ों का संरक्षण हमारे आचरण का हिस्सा बनना चाहिए।” – पंडित योगेंद्र महंत
गरिमामयी उपस्थिति: संतों और दिग्गजों का जमावड़ा
इस आयोजन में न केवल इंदौर, बल्कि धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, उज्जैन और देवास सहित दर्जन भर जिलों के पदाधिकारियों ने सपरिवार सहभागिता की।
1).प्रमुख संत: महामंडलेश्वर पवन दास महाराज, पंडित अनंत महंत, गुजरात (डाकोर जी) के प्रमुख पुजारी हरि भाई, और हंस पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रामचरण दास जी महाराज।
2). महिला नेतृत्व: श्रीमती सावित्री अग्रावत (राष्ट्रीय संयोजिका), श्रीमती अर्पणा जोशी (राष्ट्रीय समन्वयक), और श्रीमती वर्षा शर्मा (राष्ट्रीय सचिव) ने व्यवस्थाओं और भजनों की कमान संभाली।
3). प्रबंधन टीम: अशोक चतुर्वेदी, अर्जुन भारद्वाज, राजू शर्मा, शंभू नाथ मिश्रा और विनीत त्रिवेदी ने कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित किया।
आत्मीय स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार आगंतुकों को चंदन तिलक लगाकर की गई। महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

