खरगोन | (संभाग पोस्ट) शहर की नगर पालिका परिषद में विकास कार्यों को लेकर मचे घमासान के बीच अब विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस पार्षदों ने सत्ताधारी दल पर वार्डों की अनदेखी और राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। पार्षदों का स्पष्ट कहना है कि नगर पालिका प्रशासन विपक्ष के वार्डों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।
मुख्य आरोप: “सत्ता पक्ष के वार्डों में करोड़ों, विपक्ष के पास कुछ नहीं”
ज्ञापन के माध्यम से पार्षदों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:
1). बजट का असमान वितरण: पार्षदों का दावा है कि नगर पालिका अध्यक्ष के अपने वार्ड में ₹3.5 करोड़ से अधिक के विकास कार्य कराए गए हैं, जबकि विपक्षी पार्षदों के वार्डों में बुनियादी काम भी ठप पड़े हैं।
2). अनसुनी की जा रही मांगें: कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि उन्होंने सीएमओ और अध्यक्ष को कई बार लिखित और व्यक्तिगत आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
3). जनता पर दोहरी मार: पार्षदों ने तर्क दिया कि जब टैक्स पूरे शहर से समान रूप से वसूला जाता है, तो विकास की गंगा केवल चुनिंदा वार्डों में ही क्यों बह रही है?
“राजनीतिक भेदभाव के कारण शहर के कुछ हिस्सों का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।”— कांग्रेस पार्षद दल
कलेक्टर से जांच की मांग
कांग्रेस पार्षदों ने कलेक्टर से मांग की है कि नगर पालिका के विकास कार्यों के आवंटन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी वार्डों में समान रूप से कार्य शुरू नहीं हुए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रमुख उपस्थिति
इस दौरान प्रमुख रूप से निम्नलिखित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे:
1). श्रीमती लक्ष्मी मोरे (पार्षद)
2). रवि नाईक (कांग्रेस जिलाध्यक्ष)
3). हीरा परमार (पार्षद, वार्ड 14)
एवं अन्य कांग्रेसी पार्षद व कार्यकर्ता।
संपादक की टिप्पणी: नगर पालिका में विकास कार्यों को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच यह खींचतान आने वाले दिनों में और गहरा सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

