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Friday, March 6, 2026
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जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने का महा-संकल्प

भोपाल |(संभाग पोस्ट) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ की रूपरेखा और निर्देशों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के विकास का आधार और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

प्रमुख निर्देश:
अतिक्रमण पर प्रहार और नदी पुनरुद्धार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल स्रोतों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी:

अतिक्रमण मुक्त जल संरचनाएं:
जलग्रहण क्षेत्रों पर हुए अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध तत्काल और सख्त कार्यवाही की जाए।
1). नदी उद्गम विकास: प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित कर वहां सघन वृक्षारोपण किया जाएगा।
2). नवाचारों का आदान-प्रदान: बेहतर कार्य करने वाले जिले अपनी बेस्ट प्रैक्टिसेज (Innovations) दूसरे जिलों के साथ साझा करेंगे।
3). प्लास्टिक मुक्त पहल: सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित किया जाए।

अभियान का कैलेंडर:
महत्वपूर्ण तिथियां यह राज्य स्तरीय अभियान 19 मार्च (वर्ष प्रतिपदा) से आधिकारिक रूप से प्रारंभ होगा। अभियान के दौरान होने वाले प्रमुख आयोजन निम्नलिखित हैं:

1). 19 मार्च अभियान का भव्य शुभारंभ संपूर्ण मध्य प्रदेश
2). 23-24 मई अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन भोपाल
3). 25-26 मई शिप्रा परिक्रमा यात्रा उज्जैन/शिप्रा तट
4). 26 मई महादेव नदी कथा (गंगा दशहरा) उज्जैन
5). 30 मई -7 जून सदानीरा समागम एवं सैटेलाइट मैपिंग लोकार्पण भारत भवन, भोपाल

विभागीय कार्ययोजना और लक्ष्य
अभियान की सफलता के लिए विभिन्न विभागों को विशिष्ट उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं:

  1. पंचायत एवं ग्रामीण विकास (नोडल विभाग)
    1). 70 करोड़ रुपये की लागत से 2200 जल संरक्षण कार्य।
    2). 86,360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों को पूर्ण करना।
    3). प्राचीन जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार।
  2. नगरीय विकास एवं आवास
    1). 4,130 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों की स्थापना।
    2). नदियों में मिलने वाले 20 नालों का शोधन (Treatment)।
    3). युवाओं को ‘अमृत मित्र’ के रूप में ‘माय भारत पोर्टल’ पर जोड़ना।
  3. वन एवं पर्यावरण विभाग
    1). नर्मदा तटों पर 28 लाख पौधों का रोपण।
    2). वन्यजीवों हेतु 25 करोड़ की लागत से 400+ जल संरचनाओं का निर्माण।
  4. महिला एवं बाल विकास
    1). आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘जल एवं पोषण मॉडल’ बनाना।
    2). हर केंद्र के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (₹16,000) और पोषण वाटिका (₹10,000) की स्वीकृति।

“जल गंगा संवर्धन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम स्तर तक जनभागीदारी आवश्यक है। गिरते भू-जल स्तर को रोकना हम सबका सामूहिक सामाजिक दायित्व है।”— मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

सहभागी विभाग: राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, पीएचई, नर्मदा घाटी विकास, जन अभियान परिषद, एमएसएमई, स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग।

अभियान की कमान जिला स्तर पर प्रभारी मंत्रियों और कलेक्टर्स के हाथ में होगी। शासन का लक्ष्य इस बार जन-जन को जल दूत बनाकर प्रदेश के जल संकट को स्थायी रूप से समाप्त करना है।

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