खरगोन |(संभाग पोस्ट) जिले के विधानसभा क्षेत्र के बूथ क्रमांक 304 (देवलगांव) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 60 वैध मतदाताओं के नाम अचानक सूची से गायब मिले हैं।
क्या है पूरा मामला?
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान जब ड्राफ्ट सूची जारी की गई थी, तब इन सभी 60 मतदाताओं के नाम उसमें शामिल थे। लेकिन जैसे ही प्रशासन द्वारा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया, ग्रामीणों ने पाया कि उनके नाम काट दिए गए हैं।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
प्रभावित मतदाताओं और ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती:
1). कोई आवेदन नहीं: किसी भी मतदाता ने प्रपत्र-7 (Form-7) के माध्यम से नाम हटाने या स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं किया था।
2). नोटिस का अभाव: नियमानुसार नाम हटाने से पहले नोटिस जारी करना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं किया गया।
3). स्थानीय निवासी: सभी प्रभावित मतदाता वर्तमान में गांव में ही निवासरत हैं, ऐसे में उन्हें ‘अनुपस्थित’ या ‘प्रवासी’ मानकर नाम काटना समझ से परे है।
“यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। जब हम यहीं रह रहे हैं और हमने नाम हटाने का कोई आवेदन नहीं दिया, तो प्रशासन ने किस आधार पर हमारे नाम काटे?” > — एक प्रभावित ग्रामीण
कार्यवाही की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारियों से लिखित शिकायत की है। उनकी मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:
1). काटे गए 60 नामों को तत्काल पुनः मतदाता सूची में जोड़ा जाए।
2). इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार बीएलओ (BLO) या संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।
इस गड़बड़ी ने आगामी चुनाव की तैयारियों और मतदाता सूची के शुद्धिकरण के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

