खरगोन |(संभाग पोस्ट) जिला मुख्यालय पर वर्ष की पहली नेशनल लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकुमार यादव द्वारा की गई। इस दौरान न्यायालयीन लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया।
इन मामलों का हुआ निपटारा
लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के सुलहनीय (राजीनामा योग्य) प्रकरणों को रखा गया था, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
1. पारिवारिक विवाद: आपसी समझाइश से टूटे रिश्तों को जोड़ा गया (तलाक को छोड़कर)
2. वित्तीय मामले: चेक बाउंस (धारा 138), बैंक ऋण वसूली और रिकवरी मामले।
3. सार्वजनिक सेवाएं: बिजली बिल, जलकर और सम्पत्तिकर के बकाया मामले।
4. दुर्घटना दावे: मोटर दुर्घटना दावा (MACT) के प्रकरण।
5. अन्य: छोटे फौजदारी मामले और राजस्व प्रकरण।
लोक अदालत के लाभ: न्यायाधीश ने दी जानकारी
जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजकुमार यादव ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह जनता के लिए त्वरित और सुलभ न्याय का सबसे सशक्त माध्यम है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
1. अंतिम फैसला: लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है, इसके खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती।
2. कोर्ट फीस की वापसी: लंबित मामलों के सुलझने पर जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।
3. समय और धन की बचत: लंबी कानूनी प्रक्रिया के बिना एक ही दिन में मामले सुलझ जाते हैं।
4. सौहार्दपूर्ण वातावरण: यहाँ हार-जीत के बजाय आपसी सहमति पर जोर दिया जाता है, जिससे कटुता समाप्त होती है।
“लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित पुराने मामलों का बोझ कम करना और आम जनता को बिना किसी मानसिक या आर्थिक दबाव के न्याय दिलाना है।”— राजकुमार यादव, जिला एवं सत्र न्यायाधीश

