खरगोन |(संभाग पोस्ट) चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अवसर पर शुक्रवार को जिले भर में दशा माता पूजन का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के विभिन्न मंदिरों और क्षेत्रों में स्थित पीपल के वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई, जहाँ उन्होंने परिवार की खुशहाली के लिए विशेष अनुष्ठान किए।
बिगड़ी दशा सुधारने के लिए किया जाता है व्रत
पूजन करने पहुंची महिलाओं ने पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता, माँ पार्वती का ही स्वरूप हैं। यह व्रत मुख्य रूप से घर-परिवार के बिगड़े ग्रहों की दशा को सुधारने और विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए किया जाता है। महिलाओं ने पीपल की पूजा कर सौभाग्य, ऐश्वर्य, सुख-शांति और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
पूजन की प्रमुख परंपराएं और विधि
दशा माता पूजन में कुछ विशेष धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया, जो इस प्रकार हैं:
1). 10 गांठ वाला डोरा: सौभाग्यवती महिलाओं ने कच्चे सूत के 10 तारों का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठें लगाईं।
2). हल्दी का अभिषेक: इस डोरे को हल्दी से रंगा गया और पीपल के वृक्ष की प्रदक्षिणा करते हुए विधि-विधान से पूजा की गई।
3). नल-दमयंती की कथा: पूजन के पश्चात महिलाओं ने वृक्ष की छांव में बैठकर पौराणिक नल-दमयंती की कथा सुनी।
4). रक्षा सूत्र: कथा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हुए इस पवित्र डोरे को गले में धारण किया गया।
5). हल्दी-कुमकुम के छापे: घर लौटने पर महिलाओं ने मुख्य द्वार के दोनों ओर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाकर माता का स्वागत किया।
6). नियम और संयम: दशा माता के व्रत के दौरान कड़े नियमों का पालन किया जाता है। इस दिन महिलाएं केवल एक समय भोजन करती हैं और विशेष रूप से भोजन में नमक का प्रयोग वर्जित रहता है।

