खरगोन।(संभाग पोस्ट) अपनी विभिन्न मांगों और कृषि समस्याओं को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में किसानों ने जिला कलेक्टर कार्यालय में दस्तक दी। राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले एकजुट हुए किसानों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर केंद्र और राज्य सरकार से अपनी व्यथा साझा की।
प्रमुख मांगें: ‘गेहूं का दाम 2700 रुपये हो
‘ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मिल रहा मूल्य उनकी लागत और मेहनत के मुकाबले काफी कम है।
उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
1). गेहूं का उचित मूल्य: मध्य प्रदेश में गेहूं का औसत मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।
2). ट्रेड डील का विरोध: अमेरिका के साथ की गई कृषि संबंधी ट्रेड डील को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
3). MSP की गारंटी: मंडियों में समर्थन मूल्य (MSP) से कम पर हो रही फसलों की खरीद पर रोक लगे।
4). C2 + 50% फार्मूला: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार, सभी कृषि उत्पादों का मूल्य लागत प्लस 50 प्रतिशत (C2 + 50%) के फार्मूले पर तय करने की कानूनी गारंटी दी जाए।
मध्य प्रदेश के किसानों में नाराजगी क्यों?
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश के किसानों को गेहूं का कम मूल्य मिल रहा है। राज्य में बोनस की राशि घटने के कारण किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।
“एक तरफ लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ हमें मिलने वाला बोनस कम किया जा रहा है। यह किसानों के साथ सरासर अन्याय है।” — प्रदर्शनकारी किसान
कर्ज मुक्ति और भूमि अधिग्रहण पर भी रखी मांग
किसानों ने केवल फसल के दाम ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर भी मांगें बुलंद की हैं:
1). संपूर्ण कर्जमुक्ति: देश के किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त किया जाए।
2). उचित मुआवजा: जमीन अधिग्रहण की स्थिति में बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए।
3). रोजगार की गारंटी: प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
आंदोलन की चेतावनी: राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में किसान अपने हक के लिए उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

