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Tuesday, March 10, 2026
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‘सिस्टम’ की बेरुखी से स्वास्थ्य सेवाओं की ‘रीढ़’ हुई कमजोर, आशा कार्यकर्ताओं का भुगतान अटका

दिसंबर 2025 से लंबित है मानदेय, जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आशा कार्यकर्ताओं ने लगाई न्याय की गुहार; आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार।

खरगोन | (संभाग पोस्ट) मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा पर्यवेक्षक इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। लंबे समय से मानदेय (Salary) के भुगतान में हो रही देरी और अनियमितता से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

प्रमुख बिंदु: क्यों बढ़ा आशा कार्यकर्ताओं का आक्रोश?
  • लंबित मानदेय: दिसंबर 2025 से अब तक नियमित भुगतान नहीं हुआ है।
  • अधूरी राशि: जो भुगतान मिला है, वह भी आंशिक (Partial) है, जिससे जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
  • वादा खिलाफी: मुख्यमंत्री की ‘5 तारीख’ वाली घोषणा जमीनी स्तर पर बेअसर साबित हो रही है।
  • मानसिक तनाव: त्योहारों के बीत जाने के बाद भी पैसा न मिलने से परिवारों में आर्थिक तंगी का माहौल है।

    “5 तारीख का वादा, 15 तक भी खाली हाथ”
  • जिला अध्यक्ष रेखा रणछोड़ ने मीडिया से चर्चा के दौरान प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की थी कि आशा और आशा पर्यवेक्षकों का भुगतान हर महीने की 5 तारीख तक कर दिया जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि महीने की 15 तारीख बीत जाने के बाद भी पोर्टल और खातों में राशि प्रदर्शित नहीं होती।

    “हम गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण और सरकारी योजनाओं को घर-घर पहुँचाने का काम पूरी निष्ठा से करते हैं, लेकिन जब हमारे हक के पैसे की बात आती है, तो प्रशासन मौन हो जाता है।” — रेखा रणछोड़, जिला अध्यक्ष
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता का सबसे बड़ा माध्यम हैं। टीकाकरण से लेकर मातृ-शिशु सुरक्षा तक की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। ऐसे में कई महीनों से मानदेय लंबित होने के कारण उनके लिए अपनी सेवाएं जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
मुख्यमंत्री से त्वरित समाधान की मांग
ज्ञापन के माध्यम से आशा और आशा पर्यवेक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
  1. दिसंबर से अब तक का पूरा बकाया मानदेय तुरंत जारी किया जाए।
  2. भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
  3. भविष्य में हर माह की 5 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए जाएं।
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