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Friday, February 13, 2026
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भारतीय संस्कृति में एकल शोध नहीं, समग्र कल्याण आधारित है शोध की परंपरा: राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 का भव्य शुभारंभ

शोध ऐसा हो, जो बदल दे सबकी सोच: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल| [Sambhagpost News] मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शोध केवल एक अकादमिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली एक महाशक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए, जो समाज को एक नई दृष्टि और दिशा प्रदान करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मैपकास्ट) के विज्ञान भवन में ‘राष्ट्रीय शोधार्थी समागम (National Researchers Meet) 2026’ को संबोधित कर रहे थे।

तीन दिवसीय इस समागम का आयोजन दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान की रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर, वेबसाइट और अनुसंधान पर आधारित 7 पुस्तकों का विमोचन भी किया।

मुख्य बिंदु: मुख्यमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें :

1: वैज्ञानिक प्रज्ञा: मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध विज्ञान का जनक है। जब मानवीय बुद्धि में वैज्ञानिक ज्ञान मिलता है, तो वह ‘प्रज्ञान’ बन जाता है।
2: भारतीय बनाम पश्चिमी दृष्टि: उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव रहा है, लेकिन भारतीय परंपरा में शोध ‘एकल’ न होकर ‘समग्र कल्याण’ पर आधारित है।
3: नवाचार के लिए प्रतिबद्धता: डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

डिजिटल पहल और विमोचन :
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण डिजिटल और अकादमिक प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की:

1: “Mahakal: The Master of Time” वेबसाइट और महाकाल ब्रोशर का शुभारंभ।
2: 41वें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन।
3: दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित 7 नवीन पुस्तकों का विमोचन।
4: संस्थान की रिसर्च फेलोशिप के पोस्टर और वेबसाइट की लॉन्चिंग।

विशेषज्ञों के विचार: “डाटा नहीं, चिंतन आधारित हो शोध”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों ने भी अपने विचार साझा किए:

“शोधार्थी एक प्रकार से बोधार्थी है। जो शोध हमें बोध (ज्ञान) तक न ले जाए, वह व्यर्थ है। मनुष्य का ज्ञान चिंतन आधारित होना चाहिए, न कि केवल डाटा आधारित।” > — आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज

“भारत के पुनरोत्थान के लिए हमें पश्चिमी चश्मे को उतारकर भारतीय शिक्षा पद्धति और स्वदेशी दृष्टि के आधार पर कला, संस्कृति और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर शोध करना होगा।” > — श्री सुरेश सोनी, वरिष्ठ चिंतक

विकसित भारत @2047 का संकल्प
उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि यह समागम राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के अनुरूप भारत केंद्रित परंपराओं को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत केंद्रित शोध के माध्यम से हम प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को पूरा कर पुनः ‘विश्व गुरु’ बनेंगे।

कार्यक्रम की झलकियां
1: सहभागिता : देशभर से आए सैकड़ों शोधार्थी, शिक्षाविद और विशेषज्ञ।
2: अवधि: यह समागम 14 फरवरी तक चलेगा, जिसमें विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर चर्चा होगी।
3: पर्यावरण संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान भवन परिसर में पौध-रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर मैपकास्ट के अध्यक्ष डॉ. अनिल कोठारी, माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति विजय मनोहर तिवारी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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